Pet ki bimari के उपचार
नमस्कार दोस्तों, मैं आज इस ब्लॉग में आपको मैं pet ki bimari के उपचार के बारे में बताने जा रही हूँ तो कृपया इसे ध्यान से पूरा पढ़ें।
आज के समय में
भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हे अपने पेट में हो रही तकलीफ का तो पता होता है लेकिन उसे क्या कहते है या उसका क्या नाम होता है ये पता ही
नही होता।
आज ये पोस्ट
उन सभी लोगो के लिए है जो अब तक इन समस्याओं से अवगत नहीं थे लेकिन इसे पढ़ने के बाद पेट के
उन सभी रोगों की आसानी से पहचान करने में समर्थ हो जायेंगे।
- पेट हमारे शरीर का वह अंग होता है जिससे अधिकांश बीमारियों की उत्पत्ति होती है।
- पेट की इस बीमारी का मुख्य कारण नियमित अच्छा आहार यानि फाइबरयुक्त भोजन न करना, बाहर की तली हुई चीज़ों का सेवन एवं बाजारों में मिलने वाले पैकेट बंद मसालेदार उत्पादों का ग्रहण करने से इसकी उत्पत्ति होती हैं जो अत्यंत कष्टप्रद है।
- जिसके कारण अक्सर खान-पान पर ध्यान न देने से पेट के अन्तः भाग (पाचन प्रणाली) में दोष उत्पन्न होने लगते हैं। जैसे पेट दर्द, अजीर्ण, कब्ज, पेचिस, अफारा(Acute disease), अम्लपित्त(Acidity), लिवर दोष, मंदाग्नि(Retard), अरुचि, वायु विकार(Air disorder), पित्त दोष इत्यादि उत्पन्न होते हैं।
- आसान, प्राणायाम एवं ध्यान करने से, अमाशय, लिवर, पेन्क्रियास, छोटी आंत, बड़ी आँतों एवं पक्वाशय स्वस्थ बने रहते है तथा पाचन क्रिया भी सक्रिय रहती है, जिससे आँतों की क्रियाशीलता प्रभावित होती है एवं पेट के सभी रोग नियंत्रित रहते हैं।
पेट के रोगों को नियन्त्रित करने के "आसन एवं प्राणायम" | Pet ki bimari के उपचार
आसन
त्रिकोणासन, कोणासन, अर्धचंद्रासन, गोमुखासन, धनुरासन, सर्पासन, मकरासन, हस्तपादोत्तानसन, वज्रासन, मंडूकासन, भुजंगासन एवं पवनमुक्तासन।
प्राणायाम
कपालभाति, अग्निसार एवं उद्दारिदयानबन्ध ये तीन प्राणायाम है जो इसको अतिशीघ्र ठीक रखने
में सहायक है।
पेट के रोगों के नाम एवं / Pet ki bimari के उपचार
पेट दर्द
भोजन करने के
बाद अमाशय से रुक-रुक कर दर्द होना, इसमे उलटी होने के साथ खाया पीया सब निकल
जाना।
उपचार
4 ग्राम अजवाइन के साथ 2 ग्राम काला नमक गरम पानी से लेने से इसे जल्द राहत मिलती है।
अम्लपित्त (acidity)
खट्टी डकारों
का आना, पेटमे भारीपन, जलन का होना, कभी-कभी गले में जलन व सिरदर्द का होना।
उपचार
ऐसे में ज्यादा से ज्यादा ठंडी चीजों का सेवन करें। फ्रिज में
ठंडा किया दूध थोड़ा-थोड़ा पिएं, भोजन के बाद दस ग्राम गुड़ चूंसे , नारियल पानी का सेवन करे आंवला पाउडर और पिसी मिश्री मिला कर एक-एक चम्मच दिन में तीन बार
लें।
अजीर्ण (indigestion)
बासी या दूषित
भोजन खाने से पेट में भारीपन, पेट में हल्का या कभी-कभी तेज दर्द होना, बुखार, दस्त एवं उल्टी की आशंका।
उपचार
अमृत धारा की 8-10 बुँदे चीनी या बताशें से लें, पुदीने का रस और निम्बू का रस, प्याज का रस और अदरक का रस को बराबर मात्रा में मिलकर एक-एक चम्मच पियें।
पेचिस
पेचिस इसके
अंतर्गत बार बार शौच जाना पतला मल निकलना एवं पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द
एवं जकड़न का होना।
उपचार
हींग का चने
के बराबर टुकड़ा गर्म पानी से लेने से अति शीघ्र असर होता है। आधा चम्मच अजवाइन 10 gm गुड़ में मिलाकर खाएं एवं अदरक की चटनी गुड़ के साथ मिलकर चाटे। पेट पर गर्म
पानी की बोतल से सेक करें।
अरुचि
इसके अंतर्गत खाने की इच्छा न होना, पेट हर समय भरा रहना, पेट में भारीपन एवं डकारें
आना ।
उपचार
एक से तीन ग्राम अदरक छील कर बारीक काट लें और थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर दिन में
एक बार खायें। एक चम्मच सेहद में निम्बू
का रस मिलाकर धीरे-धीरे चाटें।
गैस का रोग
डकारों का आना, शरीर से गैस का बार-बार निकलना, सर में दर्द का अनुभव होना एवं कब्ज का होना।
उपचार
एक से दो लहसुन की कली छील
कर बीज निकाल कर मुनक्का में लपेट कर भोजन के पश्चात खाएं। भोजन के कुछ समय पश्चात 100 ग्राम दही में चौथाई चम्मच
अजवाइन और 1/2 ग्राम नमक मिलाकर खाने से
जल्द असर होता है।
गुर्दे का रोग
गुर्दे के रोग के अंतर्गत
कुछ इस प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे पेट के निचले हिस्से में दाएं या बाएं तरफ की पसलियों के नीचे बहुत तेज
से दर्द का होना, पेशाब का रुक-रुक कर आना एवं कभी-कभी तेज दर्द में उल्टी का
होना ये सभी इसके लक्षण है जिनकी वजह से ये रोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता रहता है और अंत में ये भयावह रूप ले लेता है।
उपचार
इसको जड़ से ख़त्म करने के लिए कुछ इस तरह के उपचार करना आवश्यक है, जैसे दर्द के स्थान पर गर्म पानी से सेंक करें।
तुलसी की पत्तियां सुखई हुई 20 ग्राम, अजवाइन 20 ग्राम, सेंधा नमक 10 ग्राम इन तींनो को मिलाकर पीस कर चूर्ण बना ले और प्रातः एवं सायं दो-दो ग्राम गर्म पानी से लेने से इसमें राहत मिलती है।
तुलसी की पत्तियां सुखई हुई 20 ग्राम, अजवाइन 20 ग्राम, सेंधा नमक 10 ग्राम इन तींनो को मिलाकर पीस कर चूर्ण बना ले और प्रातः एवं सायं दो-दो ग्राम गर्म पानी से लेने से इसमें राहत मिलती है।
निष्कर्ष
आज जैसा की जाना आपने इस ब्लॉग को पढ़ कर की सही, फाइबरयुक्त एवं शुद्ध आहार को नियमित न खाने
से आपको पेट से सम्बंधित कितनी सभी बीमारिया हो जाती है जिनकी वजह से
दिन-प्रतिदिन न चाहते हुए भी हमे कितनी तकलीफों का सामना करना पड़ता है।
कई समस्याओं के परे आपको इसके सरल उपचार भी बताये है जिनके
प्रतिदिन सेवन से आप इन रोगों को जड़ से ख़त्म कर इनसे जल्द ही छुटकारा पा सकते
हैं और ये सिर्फ कुछ प्राणायाम एवं आसन के द्वारा भी ठीक किया जा सकता है।
इस ब्लॉग में
आपने pet ki bimari के उपचार के बारे में जानकारी ले ही ली होगी जिनके बारे में अब तक
आप दूसरों से सुनते ही आ रहे थे।
लेकिन अब आप भी इस सभी पेट के रोगों से अवगत हो गये होंगे अब आपको कभी भी कोई पेट की समस्या होगी तो आप उसका तुरंत पता लगा लेंगे बिना किसी शक के।
लेकिन अब आप भी इस सभी पेट के रोगों से अवगत हो गये होंगे अब आपको कभी भी कोई पेट की समस्या होगी तो आप उसका तुरंत पता लगा लेंगे बिना किसी शक के।
आशा करती हूँ आज आप pet ki bimari के उपचार को जान कर लाभान्वित हुए
होंगे। ऐसे ही और स्वास्थ्यवर्धक ज्ञान के लिए हमसे जुड़े रहें ताकि आपको हो रही हर तकलीफ
या रोगों से हम आपकी मदद कर सकें।

4 टिप्पणियाँ
very useful tips... well researched article.
जवाब देंहटाएंGood remedies.
जवाब देंहटाएंNice Post
जवाब देंहटाएंGreat information
जवाब देंहटाएंhttps://shirdisaiba.blogspot.com/2020/05/your-saibaba.html?m=1
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